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  • राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के इंतजार में TMC: प्रोटोकॉल विवाद और आदिवासी राजनीति के बीच बंगाल में बढ़ा सियासी पारा

    राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के इंतजार में TMC: प्रोटोकॉल विवाद और आदिवासी राजनीति के बीच बंगाल में बढ़ा सियासी पारा

    नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ का मामला अब राष्ट्रपति भवन के दरवाजे तक पहुँच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का औपचारिक समय मांगा है, लेकिन पार्टी का दावा है कि कई दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा और केंद्र सरकार, ममता बनर्जी सरकार पर राष्ट्रपति के अपमान का गंभीर आरोप लगा रही हैं।

    1. सौगत रॉय का बड़ा दावा: “हमें समय क्यों नहीं दिया जा रहा?”

    शुक्रवार को संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए TMC के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने अपनी निराशा जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को यह बताना चाहता है कि बंगाल सरकार ने आदिवासी समाज के उत्थान के लिए क्या-क्या ठोस कदम उठाए हैं।

    सौगत रॉय ने कहा, “हमने 9 मार्च को ही पत्र लिखकर समय मांगा था, लेकिन 13 मार्च तक हमें राष्ट्रपति भवन से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।” गौरतलब है कि डेरेक ओ’ब्रायन ने इस संबंध में 12 से 15 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल के लिए समय मांगा था।

    2. विवाद की जड़: संथाल सम्मेलन और मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति

    इस पूरे विवाद की शुरुआत 7 मार्च को हुई, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल की यात्रा पर थीं। एक संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ने कुछ ऐसी बातें कहीं जिन्होंने ममता सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया:

    • व्यवस्थाओं पर नाराजगी: राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल के चयन पर सवाल उठाया और कहा कि दूरदराज का इलाका होने के कारण कई आदिवासी भाई-बहन इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

    • नेताओं की अनुपस्थिति: राष्ट्रपति ने मंच से गौर किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के कैबिनेट मंत्री इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे।

    3. ममता बनर्जी की सफाई: “संघर्ष बड़ा है या प्रोटोकॉल?”

    विपक्ष के हमलों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम सीधे राज्य सरकार या TMC द्वारा आयोजित नहीं किया गया था। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति का कारण बताते हुए कहा कि वह उस समय केंद्र के खिलाफ एक धरने में शामिल थीं। ममता बनर्जी का तर्क था कि वह “जनता के हक की लड़ाई” लड़ रही थीं और उनका इरादा राष्ट्रपति का अपमान करना कतई नहीं था।

    4. भाजपा का तीखा हमला: पीएम मोदी और जेपी नड्डा का मोर्चा

    इस मुद्दे को भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कहा कि बंगाल सरकार ने देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के प्रति “घोर अनादर” दिखाया है। वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे महिला सशक्तिकरण के खिलाफ बताते हुए कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री द्वारा एक महिला राष्ट्रपति का अपमान करना निंदनीय है।

    5. TMC का ‘रिपोर्ट कार्ड’ दिखाने का प्रयास

    राष्ट्रपति से मिलने की TMC की इस जल्दबाजी के पीछे एक सोची-समझी रणनीति है। पार्टी चाहती है कि वह राष्ट्रपति के सामने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए शुरू की गई योजनाओं का विवरण पेश करे।

    • शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा: पत्र के अनुसार, TMC सरकार ने आदिवासियों के लिए बुनियादी ढांचे और विशेष छात्रवृत्ति योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।

    • सांस्कृतिक विकास: पार्टी यह साबित करना चाहती है कि उसकी नीतियां केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर हैं।

    6. विश्लेषण: आदिवासी वोट बैंक और 2026 की राह

    पश्चिम बंगाल में आदिवासी (संथाल) समुदाय का वोट बैंक कई जिलों में निर्णायक भूमिका निभाता है। राष्ट्रपति मुर्मू खुद इसी समुदाय से आती हैं, ऐसे में उन पर की गई कोई भी टिप्पणी या प्रोटोकॉल में चूक TMC के लिए राजनीतिक रूप से महंगी साबित हो सकती है। यही कारण है कि ममता बनर्जी अब राष्ट्रपति से मिलकर अपनी छवि को सुधारने और डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रही हैं।

    7. निष्कर्ष: क्या राष्ट्रपति भवन से मिलेगा संदेश?

    फिलहाल गेंद राष्ट्रपति भवन के पाले में है। क्या TMC के 15 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा? या फिर यह विवाद केंद्र और राज्य के बीच एक और ‘अवरोध’ बनकर खड़ा हो जाएगा? आने वाले कुछ दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

  • राज्यसभा में केरल की ‘स्पीड’ पर संग्राम: अश्विनी वैष्णव और जॉन ब्रिटास के बीच तीखी बहस, जानें क्या है हाई-स्पीड कॉरिडोर का पूरा विवाद

    राज्यसभा में केरल की ‘स्पीड’ पर संग्राम: अश्विनी वैष्णव और जॉन ब्रिटास के बीच तीखी बहस, जानें क्या है हाई-स्पीड कॉरिडोर का पूरा विवाद

    नई दिल्ली: भारतीय संसद का प्रश्नकाल अक्सर नीतिगत चर्चाओं का केंद्र होता है, लेकिन शुक्रवार को राज्यसभा में दृश्य कुछ अलग था। केरल में प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और CPI(M) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस बहस ने न केवल केरल की रेल परियोजनाओं की स्थिति को उजागर किया, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच गहरे राजनीतिक मतभेदों को भी सतह पर ला दिया।

    1. विवाद की जड़: मार्केटिंग बनाम हकीकत

    बहस की शुरुआत तब हुई जब सांसद जॉन ब्रिटास ने रेल मंत्री की कार्यशैली पर कटाक्ष किया। ब्रिटास ने कहा कि अश्विनी वैष्णव “चीजों को दिखाने और उनकी मार्केटिंग करने” में माहिर हैं। उनका मुख्य तर्क यह था कि बजट में घोषित हाई-स्पीड कॉरिडोर की सूची से केरल को बाहर रखा गया है, जबकि मंत्री बार-बार पुराने सर्वेक्षणों (Surveys) का हवाला दे रहे हैं।

    ब्रिटास का सवाल सीधा था—जब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही जमा की जा चुकी है, तो रेलवे बार-बार नए सर्वेक्षणों की बात क्यों कर रहा है? उन्होंने विशेष रूप से मेट्रो मैन ई. श्रीधरन के पत्र का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या सरकार उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए अधिकृत करने जा रही है या सिर्फ समय बिता रही है।

    2. अश्विनी वैष्णव का पलटवार: ‘कांग्रेस कम्युनिस्ट पार्टी’ पर प्रहार

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्रिटास की “मार्केटिंग” वाली टिप्पणी को अपमानजनक बताया और पलटवार करने में देरी नहीं की। उन्होंने केरल में सत्ताधारी LDF और विपक्षी UDF पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘कांग्रेस कम्युनिस्ट पार्टी’ करार दिया।

    वैष्णव का आरोप था कि केंद्र सरकार ने केरल में रेलवे के विकास के लिए 1,900 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, लेकिन राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) में सहयोग नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य सरकार जमीन नहीं सौंपती, तब तक कोई भी प्रोजेक्ट कागजों से जमीन पर नहीं उतर सकता।

    3. केरल हाई-स्पीड कॉरिडोर: तीन विकल्प और बड़ी चुनौतियां

    रेल मंत्री ने सदन को बताया कि केरल के लिए वर्तमान में तीन तकनीकी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है:

    1. K-Rail (SilverLine) प्रोजेक्ट: यह केरल राज्य सरकार का प्रस्ताव है, जो तटबंध (Embankment) पर आधारित है। हालांकि, इसे पर्यावरण और विस्थापन संबंधी चिंताओं के कारण भारी विरोध का सामना करना पड़ा है।

    2. सतह आधारित कॉरिडोर: यह रेलवे द्वारा कराया गया सर्वेक्षण है, जिसमें ट्रैक जमीन की सतह पर बिछाए जाएंगे।

    3. एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor): मेट्रो मैन ई. श्रीधरन ने पूरे उत्तर-दक्षिण केरल में एक ऊंची (Elevated) लाइन बनाने का प्रस्ताव दिया है। वैष्णव के अनुसार, इसकी लागत लगभग 300 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर आएगी।

    रेलवे अब इन तीनों में से सबसे ‘किफायती और बेहतरीन’ विकल्प की तलाश में है।

    4. बजट 2026-27 और केरल की अनदेखी का आरोप

    इस बहस के पीछे की एक बड़ी वजह केंद्रीय बजट 2026-27 भी है। बजट में सरकार ने देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है, लेकिन इनमें केरल का कोई जिक्र नहीं है। केरल के सांसदों का तर्क है कि दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है।

    5. ई. श्रीधरन के प्रस्ताव का महत्व

    डॉ. ई. श्रीधरन का प्रस्ताव इस पूरी बहस का केंद्र बिंदु बना हुआ है। श्रीधरन ने तर्क दिया है कि केरल जैसे घनी आबादी वाले राज्य में जमीन पर ट्रैक बिछाना बहुत मुश्किल और महंगा है, इसलिए एलिवेटेड लाइन ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान है। रेल मंत्री ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही श्रीधरन को चर्चा के लिए बुलाएंगे, जो केरल की जनता के लिए एक उम्मीद की किरण हो सकती है।

    6. राजनीतिक गतिरोध और विकास की बलि

    यह पहली बार नहीं है जब केरल की रेल परियोजनाएं राजनीति की भेंट चढ़ी हों। सबरी रेल लाइन का उदाहरण देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि राज्य सरकार ने भारी दबाव के बाद ही इसके लिए काम शुरू किया। वहीं, विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार राजनीतिक कारणों से गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है।

    7. निष्कर्ष: केरल के यात्रियों को कब मिलेगी रफ्तार?

    संसद में हुई इस तीखी बहस से एक बात साफ है कि केरल के लिए हाई-स्पीड रेल का रास्ता अभी भी चुनौतियों भरा है। तकनीकी विकल्पों की तलाश और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम यात्री अभी भी पुरानी लाइनों और धीमी रफ्तार पर निर्भर है। यदि केंद्र और राज्य मिलकर भूमि अधिग्रहण और फंडिंग के मुद्दों को नहीं सुलझाते, तो ‘हाई-स्पीड’ का सपना फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगा।

  • Main Wapas Aaunga Teaser: बंटवारे के दर्द और अमर प्रेम की दास्तां लेकर लौटे इम्तियाज अली, दिलजीत की आवाज ने जीता दिल

    Main Wapas Aaunga Teaser: बंटवारे के दर्द और अमर प्रेम की दास्तां लेकर लौटे इम्तियाज अली, दिलजीत की आवाज ने जीता दिल

    मुंबई न्यूज़ डेस्क: सिनेमा जगत में जब भी रूहानी इश्क और सफर की बात होती है, तो एक नाम सबसे ऊपर आता है—इम्तियाज अली। ‘तमाशा’, ‘रॉकस्टार’ और ‘जब वी मेट’ जैसी कल्ट क्लासिक्स देने वाले इम्तियाज एक बार फिर अपनी अगली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के साथ बड़े पर्दे पर लौट रहे हैं। हाल ही में फिल्म का टीजर रिलीज किया गया है, जिसने न केवल फैंस बल्कि समीक्षकों को भी अपनी गहराई से चौंका दिया है।

    1. टीजर का भावुक सफर: नसीर की आंखें और दिलजीत की आवाज

    1 मिनट 13 सेकंड का यह टीजर किसी जादुई अहसास से कम नहीं है। इसकी शुरुआत दिलजीत दोसांझ की उस ठहराव भरी आवाज से होती है, जो सीधे दिल पर दस्तक देती है। टीजर में हम दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को अस्पताल के बिस्तर पर देखते हैं। उनकी खामोश आंखें बिना कुछ कहे दशकों पुराना दर्द बयां कर रही हैं। दिलजीत की आवाज हमें नसीर के किरदार की उस अधूरी प्रेम कहानी से रूबरू कराती है, जिसे वक्त भी नहीं मिटा सका।

    2. 1947 का बंटवारा: जब सरहदें खिंचीं, पर दिल नहीं बंटे

    फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी पृष्ठभूमि है। यह कहानी हमें 1947 के उस काले दौर में ले जाती है, जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ था। इम्तियाज अली ने इस फिल्म के जरिए यह दिखाने की कोशिश की है कि पलायन केवल जमीन का नहीं होता, बल्कि भावनाओं का भी होता है।

    फिल्म में वेदांग रैना ने नसीरुद्दीन शाह के युवा स्वरूप का किरदार निभाया है, जबकि शरवरी उनकी प्रेमिका के रूप में नजर आ रही हैं। टीजर में दिखाए गए 1947 के दृश्य—वो पुरानी ट्रेनें, धूल भरी गलियां और आंखों में अपनों को खोने का डर—फिल्म की भव्यता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।

     

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    3. ‘अमर सिंह चमकीला’ के बाद दिलजीत-इम्तियाज का दूसरा ‘मैजिक’

    साल 2024 में नेटफ्लिक्स पर आई ‘अमर सिंह चमकीला’ ने साबित कर दिया था कि दिलजीत दोसांझ और इम्तियाज अली की जोड़ी पर्दे पर कविता रच सकती है। चमकीला की सफलता और दिलजीत को मिले इंटरनेशनल एमी नॉमिनेशन के बाद, दर्शकों की उम्मीदें ‘मैं वापस आऊंगा’ से सातवें आसमान पर हैं। जहाँ ‘चमकीला’ एक बायोपिक थी, वहीं ‘मैं वापस आऊंगा’ एक काल्पनिक लेकिन हकीकत के बेहद करीब लगने वाली दास्तां है।

    4. ए.आर. रहमान और इरशाद कामिल: संगीत जो रूह को छुएगा

    इम्तियाज अली की फिल्मों की आत्मा हमेशा उनका संगीत रहा है। एक बार फिर ए.आर. रहमान का संगीत और इरशाद कामिल के शब्द इस सफर को पूरा कर रहे हैं। टीजर के बैकग्राउंड में बजता संगीत ही यह बताने के लिए काफी है कि फिल्म के गाने आने वाले समय में चार्टबस्टर होने वाले हैं। ‘विंडो सीट फिल्म्स’ और ‘अपलॉज़ एंटरटेनमेंट’ का यह संयुक्त निर्माण तकनीकी रूप से भी काफी मजबूत नजर आ रहा है।

    5. “पलायन इस सदी की सबसे बड़ी कहानी है”: इम्तियाज अली

    फिल्म के बारे में बात करते हुए इम्तियाज अली ने एक बहुत ही गहरी बात कही। उन्होंने कहा, “क्या किसी के दिल से उसका घर छीना जा सकता है? अतीत हमेशा हमारे साथ रहता है। जब सारे दर्द कह दिए जाते हैं, तब भी प्यार का वो शुरुआती एहसास बाकी रह जाता है।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि यह फिल्म केवल एक प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि यह ‘नॉस्टैल्जिया’ और ‘पहचान’ की तलाश है।

    6. स्टार कास्ट: नए और पुराने सितारों का संगम

    • नसीरुद्दीन शाह: उनकी मौजूदगी ही फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाती है।

    • दिलजीत दोसांझ: अपनी सादगी और आवाज से फिल्म के सूत्रधार बने हैं।

    • वेदांग रैना: ‘द आर्चीज’ के बाद वेदांग के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण और करियर-डिफाइनिंग रोल हो सकता है।

    • शरवरी: अपनी पिछली फिल्मों में दमदार अभिनय के बाद, वह एक पीरियड ड्रामा में क्या जादू बिखेरती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

    7. निष्कर्ष: क्यों देखें ‘मैं वापस आऊंगा’?

    आज के दौर में जहाँ एक्शन और थ्रिलर फिल्मों की भरमार है, वहीं ‘मैं वापस आऊंगा’ उस सुकून और ठहराव की तरह है जिसकी तलाश हर सिनेमा प्रेमी को होती है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि भौतिक दूरियां कभी भावनाओं को खत्म नहीं कर सकतीं।

    फिल्म की रिलीज डेट: यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। अगर आप ‘विभाजन की कहानियों’ और ‘इम्तियाज अली के सिनेमा’ के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपकी लिस्ट में टॉप पर होनी चाहिए।

  • हरिद्वार रोडवेज में वेतन संकट: “साहब! वेतन दे दो ताकि हम भी मना सकें होली”, कर्मचारियों ने एजीएम को सौंपा ज्ञापन

    हरिद्वार रोडवेज में वेतन संकट: “साहब! वेतन दे दो ताकि हम भी मना सकें होली”, कर्मचारियों ने एजीएम को सौंपा ज्ञापन

    हरिद्वार: उत्तराखंड में होली के त्योहार की खुशियाँ परवान चढ़ रही हैं, लेकिन हरिद्वार रोडवेज डिपो के सैकड़ों कर्मचारियों के घरों में इस बार अंधेरा छाया हुआ है। पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने से नाराज रोडवेज कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। शुक्रवार को कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हरिद्वार डिपो के सहायक महाप्रबंधक (AGM) का घेराव किया और स्पष्ट कर दिया कि यदि त्योहार से पहले भुगतान नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

    पक्के और कच्चे सभी कर्मचारी बेहाल

    रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने साफ कर दिया है कि वेतन का संकट सिर्फ नियमित अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिपो के हर छोटे-बड़े कर्मचारी का बुरा हाल है। यूनियन की ओर से दिए गए ज्ञापन में चार मुख्य श्रेणियों के लिए तत्काल भुगतान की मांग की गई है:

    • नियमित कर्मचारी (Regular Staff): इनका घर खर्च चलाना अब मुश्किल हो चला है।

    • संविदा कर्मचारी (Contractual Workers): कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी सबसे ज्यादा आर्थिक मार झेल रहे हैं।

    • PRD और एजेंसी स्टाफ: पीआरडी और बाहरी एजेंसी के जरिए काम करने वालों के पास भी पैसा नहीं पहुँचा है।

    • विशेष श्रेणी (Special Category): इस वर्ग के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

    “परिवार चलाना हुआ मुश्किल”

    कर्मचारियों का कहना है कि जनवरी और फरवरी महीने का वेतन अटकने से उनकी पूरी बजट व्यवस्था पटरी से उतर गई है। आलम यह है कि दिसंबर का वेतन भी बड़ी जद्दोजहद के बाद महज एक सप्ताह पहले नसीब हुआ था। कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वेतन न मिलने से राशन से लेकर बच्चों की स्कूल फीस तक के लिए संकट खड़ा हो गया है। उनकी मांग है कि इन सभी वर्गों को होली से पहले भुगतान किया जाए ताकि वे भी अपने परिवारों के साथ खुशी-खुशी त्योहार मना सकें।

    हड़ताल की आहट?

    होली के मौके पर रोडवेज बसों पर यात्रियों का भारी दबाव रहता है। हरिद्वार डिपो से उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों के लिए बड़ी संख्या में बसें चलती हैं। ऐसे में यदि कर्मचारियों का असंतोष बढ़ता है और वे किसी कड़े कदम की ओर बढ़ते हैं, तो परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल, एजीएम ने कर्मचारियों की मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुँचाने का आश्वासन दिया है, लेकिन कर्मचारी अब केवल कोरे आश्वासनों से संतुष्ट होने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

  • Rashmika-Vijay Wedding: आखिर सच हो गया फैंस का सपना! रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने रचाई शादी, एक्ट्रेस ने लिखा- “मेरा पति”

    Rashmika-Vijay Wedding: आखिर सच हो गया फैंस का सपना! रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने रचाई शादी, एक्ट्रेस ने लिखा- “मेरा पति”

    हैदराबाद/मुंबई: साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाने वाली ‘नेशनल क्रश’ Rashmika Mandana और ‘अर्जुन रेड्डी’ फेम Vijay Deverakonda ने आखिरकार अपने प्यार पर शादी की मुहर लगा दी है। लंबे समय से चल रही अटकलों और रूमर्स को खत्म करते हुए इस पावर कपल ने गुपचुप तरीके से शादी रचा ली है। रश्मिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर एक बेहद इमोशनल पोस्ट के साथ अपने “मिस्टर विजय देवरकोंडा” का दुनिया से परिचय कराया है।

    इंस्टाग्राम पर रश्मिका का इमोशनल पोस्ट: “विज्जू, मेरे पास शब्द नहीं हैं”

    रश्मिका ने अपनी शादी की घोषणा करते हुए विजय के लिए एक दिल छू लेने वाला नोट लिखा। उन्होंने लिखा:

    “पेश है मेरे पति— मिस्टर विजय देवरकोंडा!! वह इंसान जिसने मुझे सिखाया कि सच्चा प्यार क्या होता है। जिसने मुझे बताया कि बड़े सपने देखना बिल्कुल सही है और मैं अपनी सोच से भी ज्यादा हासिल करने की काबिलियत रखती हूं।”

    रश्मिका ने आगे विजय (Vijju) को अपना सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम बताते हुए कहा कि वह आज जो कुछ भी हैं, विजय की वजह से हैं। उन्होंने लिखा कि अब उनकी जीत, संघर्ष और खुशियों का एक असली मतलब निकल कर आ रहा है, क्योंकि अब विजय उनके साथ हैं।

    फैंस के बीच खुशी की लहर: ‘ViRash’ हुआ सच

    सोशल मीडिया पर रश्मिका और विजय की जोड़ी को फैंस प्यार से #ViRash बुलाते हैं। ‘गीता गोविंदम’ और ‘डियर कॉमरेड’ जैसी फिल्मों में इनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने पहले ही लोगों का दिल जीत लिया था। काफी समय से दोनों को वेकेशन और डिनर डेट्स पर साथ देखा जाता था, लेकिन दोनों ने हमेशा अपने रिश्ते पर चुप्पी साधे रखी थी।

    यूपी और बिहार में भी जबरदस्त क्रेज

    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और बिहार जैसे हिंदी भाषी राज्यों में भी इन दोनों सितारों की जबरदस्त फैन फॉलोइंग है। ‘पुष्पा’ फिल्म के बाद रश्मिका घर-घर में Srivalli के नाम से मशहूर हो गईं, वहीं विजय देवरकोंडा को उनके बेबाक अंदाज के लिए पसंद किया जाता है। सोशल मीडिया पर सुबह से ही बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई है। फैंस इसे “साल की सबसे बड़ी शादी” बता रहे हैं।

    खबर है कि यह जोड़ा जल्द ही अपने इंडस्ट्री के दोस्तों के लिए एक ग्रैंड रिसेप्शन (Grand Reception) होस्ट कर सकता है। हालांकि, अभी तक शादी की आधिकारिक तस्वीरों का इंतजार बना हुआ है, लेकिन रश्मिका के इस कन्फर्मेशन ने इंटरनेट पर आग लगा दी है।

  • Holi in Lohaghat: लोहाघाट में सीएम धामी ने खेली होली, 162 करोड़ की योजनाओं की सौगात देकर बोले- ‘विरासत बचाना हमारी जिम्मेदारी’

    Holi in Lohaghat: लोहाघाट में सीएम धामी ने खेली होली, 162 करोड़ की योजनाओं की सौगात देकर बोले- ‘विरासत बचाना हमारी जिम्मेदारी’

    लोहाघाट, उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक छटा आज लोहाघाट (Lohaghat) में देखते ही बनी। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami शुक्रवार को चंपावत जिले के लोहाघाट पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध ‘काली कुमाऊं होली रंग महोत्सव’ में हिस्सा लिया। रंगों और फाग के गीतों के बीच सीएम ने न केवल स्थानीय लोगों के साथ होली मनाई, बल्कि क्षेत्र के विकास के लिए 162 Crore रुपये से अधिक की परियोजनाओं का तोहफा भी दिया।

    काली कुमाऊं की परंपरा और धामी का साथ

    मुख्यमंत्री का स्वागत करने के लिए लोहाघाट की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। ढोल-दमाऊ की थाप और अबीर-गुलाल के बीच सीएम धामी ने जनसभा को संबोधित किया। उनके साथ मंच पर केंद्रीय मंत्री और अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ से लोकप्रिय सांसद (MP) Ajay Tamta, बीजेपी जिला अध्यक्ष गोविंद सामंत और जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    सीएम धामी ने भावुक होते हुए कहा:

    “आज इतनी बड़ी भीड़ और आप सबका प्यार देखकर मेरा दिल खुशी से भर गया है। कुमाऊं की खड़ी होली (Khadi Holi) और बैठकी होली (Baithki Holi) हमारी विशिष्ट पहचान है। इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बचाना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

    विकास की बौछार: 45 प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास

    होली के इस उल्लास के बीच मुख्यमंत्री ने विकास का पहिया भी घुमाया। उन्होंने जिले के लिए 162 Crore रुपये से ज्यादा की 45 Development Projects का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लोहाघाट, चंपावत, देवीधुरा या तल्ला देश, कोई भी क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहेगा।

    बचपन की यादें और भाईचारे का संदेश

    मुख्यमंत्री ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे वह होली के त्योहार, घर में बनने वाली गुझिया और पारंपरिक लोकगीतों का बेसब्री से इंतजार करते थे। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे (Brotherhood) का प्रतीक है। सीएम ने आयोजक जीवन मेहता और उनकी टीम को इस परंपरा को जीवंत रखने के लिए बधाई दी।

    यूपी और पड़ोसी राज्यों के पर्यटकों के लिए खास

    लोहाघाट और चंपावत का यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बरेली, पीलीभीत और लखीमपुर जैसे जिलों से बड़ी संख्या में लोग यहाँ की होली देखने और घूमने आते हैं। मुख्यमंत्री के विजन के अनुसार, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में सुधार होने से यहाँ धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को भी नई गति मिलेगी।

    अहम घोषणाएं और विजन:

    • Projects: ₹162 करोड़ की कुल 45 योजनाओं की शुरुआत।

    • Focus: कुमाऊंनी लोक कला, संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण।

    • Connect: सीमांत क्षेत्रों में सड़क और जनसुविधाओं का विस्तार।

    मुख्यमंत्री धामी ने अंत में सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि यह त्योहार हर किसी के जीवन में प्यार, उत्साह और खुशियों के रंग लेकर आए।

  • देहरादून में 30वें ‘दिव्य कला मेले’ का भव्य आगाज: दिव्यांगजनों के हुनर को मिला ग्लोबल प्लेटफॉर्म, गवर्नर गुरमीत सिंह ने बढ़ाया उत्साह

    देहरादून में 30वें ‘दिव्य कला मेले’ का भव्य आगाज: दिव्यांगजनों के हुनर को मिला ग्लोबल प्लेटफॉर्म, गवर्नर गुरमीत सिंह ने बढ़ाया उत्साह

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक रेंजर्स ग्राउंड में रविवार को एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ, जब प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने 30th Divya Kala Mela का विधिवत उद्घाटन किया। मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के साहस की कहानी है जो शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Third largest economy) बनाने के लक्ष्य में हमारे दिव्यांगजनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यपाल सिंह ने मेले में प्रदर्शित उत्पादों को Self-reliant India (आत्मनिर्भर भारत) की जीती-जागती तस्वीर बताया। उन्होंने आधुनिक युग की मांग को देखते हुए दिव्यांगजनों के लिए Technological innovation और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाने की वकालत की। उनके अनुसार, तकनीक कभी भेदभाव नहीं करती और यह दिव्यांगों के लिए वैश्विक बाजारों (Global Market) के द्वार खोलने में एक मजबूत पुल का काम करेगी।

    सरकारी योजनाओं का सुरक्षा कवच और ₹375 करोड़ का बजट

    समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने केंद्र सरकार की प्रतिबद्धताओं को दोहराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 ने दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक मजबूत कानूनी और सामाजिक आधार तैयार किया है। मंत्री ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान बजट में Assistive devices की खरीद और फिटिंग के लिए 375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसका क्रियान्वयन ‘आर्टिफिशियल लिम्ब्स मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ के जरिए किया जा रहा है। इस योजना का सीधा लाभ जमीनी स्तर पर लाखों लोगों तक पहुँच रहा है। कार्यक्रम में टिहरी की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने इस मेले को सामाजिक बदलाव का एक ‘उत्प्रेरक’ करार दिया। उन्होंने भारतीय पैरालिंपिक खिलाड़ियों की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रतिभा किसी सीमा या शारीरिक बनावट की मोहताज नहीं होती।

    आर्थिक सशक्तिकरण के आंकड़े: करोड़ों का व्यापार और हजारों को रोजगार

    देहरादून में आयोजित इस मेले का 30वां संस्करण देशव्यापी श्रृंखला का एक अहम पड़ाव है। Department of Empowerment of Persons with Disabilities (DEPwD) के आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में हुए 29 मेलों के माध्यम से लगभग 2,362 दिव्यांग उद्यमियों ने हिस्सा लिया है, जिससे 23 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष व्यापार (Direct Business) हुआ है। सरकार ने इन उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण (Loan Approval) मंजूर किए हैं। केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि Employment opportunities सृजित करने की दिशा में भी यह मंच मील का पत्थर साबित हुआ है। अब तक आयोजित रोजगार मेलों में 3,131 से अधिक उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1,007 को शॉर्टलिस्ट किया गया और 313 से अधिक युवाओं को प्रतिष्ठित कंपनियों से जॉब ऑफर प्राप्त हुए हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि Economic empowerment की दिशा में उठाए गए ये कदम अब सार्थक परिणाम दे रहे हैं।

    नौ दिनों तक दिखेगी 16 राज्यों की कला: सांस्कृतिक उत्सव का संगम

    देहरादून का यह नौ दिवसीय मेला 1 मार्च 2026 तक चलेगा, जिसमें 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 100 से अधिक दिव्यांग कारीगर अपने स्टॉल सजाए हुए हैं। यहाँ आने वाले दर्शक Handicraft and handloom उत्पादों के साथ-साथ गृह सज्जा, ऑर्गेनिक खाद्य सामग्री, और पारंपरिक ज्वेलरी का आनंद ले सकते हैं। मेले में कुल 90 स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की स्थानीय कला के साथ-साथ दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत की हस्तशिल्प कला का अद्भुत मेल देखने को मिल रहा है। आगामी 26 फरवरी को यहाँ एक विशेष Job Fair का आयोजन किया जाएगा, जबकि 1 मार्च को ‘दिव्य कला शक्ति’ नामक एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा, जो दिव्यांग कलाकारों के असाधारण टैलेंट (Extraordinary Talent) को दुनिया के सामने रखेगा। मेले में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस Inclusive platform का हिस्सा बन सकें और दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अपना सहयोग दे सकें।

  • संस्कृत का गौरव और कुंभ की तैयारी: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने छात्रों को दी स्कॉलरशिप, हरिद्वार के लिए बनाया मास्टर प्लान

    संस्कृत का गौरव और कुंभ की तैयारी: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने छात्रों को दी स्कॉलरशिप, हरिद्वार के लिए बनाया मास्टर प्लान

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रविवार को मुख्यमंत्री कैंप ऑफिस स्थित मुख्य सेवक सदन एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने Sanskrit Student Talent Award कार्यक्रम में शिरकत कर प्रदेश की प्राचीन भाषा को नई ऊर्जा प्रदान की। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने मेधावी छात्राओं के लिए Gargi Girls Sanskrit Scholarship और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए Dr. BR Ambedkar SC/ST Sanskrit Scholarship का वितरण किया। सीएम धामी ने न केवल छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि संस्कृत को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ‘कॉम्पिटिटिव एग्जाम सेल्फ-स्टडी सेंटर’ और ‘ई-संस्कृत बातचीत कैंप’ का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य Sanskrit education को सुलभ बनाना और छात्रों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी की त्रैमासिक पत्रिका ‘संस्कृत वार्ता’ का विमोचन करते हुए स्पष्ट किया कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी Cultural heritage का आधार है। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों की ओर लौटने और राष्ट्र निर्माण में इस देवभाषा के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    हरिद्वार कुंभ 2027: विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ होगा ऐतिहासिक आयोजन

    संस्कृत कार्यक्रम से पूर्व, मुख्यमंत्री धामी ने शनिवार को हरिद्वार का दौरा कर आगामी कुंभ मेले की तैयारियों की कमान संभाली। एक High-level meeting के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अगला कुंभ मेला ‘दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक’ होना चाहिए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और Public facilities सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कुंभ से जुड़े सभी स्थायी निर्माण कार्य इस साल अक्टूबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कुंभ क्षेत्र में Infrastructure development की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘थर्ड-पार्टी ऑडिट’ का आदेश भी दिया है। बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। Urban planning के तहत घाटों का सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के आने-जाने के रास्तों को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। सीएम ने अधिकारियों को ‘टाइम-बाउंड मैनर’ में काम करने और सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल (Coordination) बिठाने की नसीहत दी।

    श्रद्धालुओं के लिए स्मार्ट सुविधाएं: नाव एम्बुलेंस और विशेष पार्किंग व्यवस्था

    कुंभ मेले के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक व्यापक Transport and parking strategy तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे वैकल्पिक मार्गों की पहचान करें ताकि जाम की स्थिति न बने। विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए घाटों पर विशेष प्रबंध किए जाएंगे। Healthcare management को लेकर मुख्यमंत्री ने एक अनूठी पहल की है, जिसके तहत भीड़भाड़ वाले इलाकों और गंगा के घाटों पर बीमार लोगों की मदद के लिए ‘नाव और बाइक एम्बुलेंस’ (Bike Ambulance Service) तैनात की जाएगी। स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंने Waste management के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री का विजन है कि हरिद्वार आने वाला हर श्रद्धालु उत्तराखंड की अतिथि देवो भवः की परंपरा और Spiritual experience की सुखद यादें लेकर जाए। इस बड़े आयोजन के लिए ज़ोन और सेक्टर स्तर पर माइक्रो-प्लानिंग शुरू कर दी गई है।

    विरासत और विकास का संतुलन: उत्तराखंड सरकार का संकल्प

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ये दोनों कार्यक्रम एक बड़े विजन को दर्शाते हैं। एक तरफ जहां वे Language conservation के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुंभ जैसे वैश्विक आयोजन के जरिए प्रदेश के Tourism and infrastructure को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साझा सांस्कृतिक परिवेश में हरिद्वार कुंभ का विशेष महत्व है, जिसे देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े मानक तय किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों की प्रोग्रेस रिपोर्ट समय-समय पर अपडेट की जाए। इस बार कुंभ में तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल होगा, जिससे Crowd management और रियल-टाइम मॉनिटरिंग में आसानी होगी। धामी सरकार का यह संकल्प है कि 2027 का कुंभ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बने, बल्कि आधुनिक उत्तराखंड की कार्यक्षमता का भी प्रतीक बने।

  • सरहद पर बढ़ेगी ताकत: उत्तराखंड की वादियों में भारत और जापान का संयुक्त युद्धाभ्यास ‘धर्म गार्जियन 2026’ शुरू

    सरहद पर बढ़ेगी ताकत: उत्तराखंड की वादियों में भारत और जापान का संयुक्त युद्धाभ्यास ‘धर्म गार्जियन 2026’ शुरू

    देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सैन्य कूटनीति का केंद्र बनने जा रही है। भारतीय सेना ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत और जापान के बीच बहुप्रतीक्षित संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘Dharma Guardian 2026’ का 7वां संस्करण कल यानी 24 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। अल्मोड़ा जिले के पास स्थित Chaubatia, Uttarakhand के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में होने वाला यह अभ्यास 9 मार्च 2026 तक चलेगा। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य Joint urban warfare और आतंकवाद विरोधी अभियानों (Counter-terrorism operations) के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल यानी ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ को एक नए स्तर पर ले जाना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इस तरह के कठिन सैन्य प्रशिक्षण के लिए दुनिया में सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। दो हफ़्तों तक चलने वाले इस सघन कार्यक्रम में भारतीय सैनिक और जापानी आत्म-रक्षा बल (JGSDF) के जवान एक साथ मिलकर आधुनिक युद्ध की बारीकियों को समझेंगे और अपनी रणनीतिक क्षमताओं को साझा करेंगे।

    तकनीक और कौशल का अनूठा संगम: ISR ग्रिड से लेकर हेलीबोर्न मिशन तक

    आगामी 14 दिनों के भीतर, दोनों सेनाएं न केवल अपने हथियारों का प्रदर्शन करेंगी, बल्कि Tactical drills को सिंक्रोनाइज़ करने और विशेष कॉम्बैट स्किल्स पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी। इस अभ्यास की रूपरेखा को काफी आधुनिक बनाया गया है, जिसमें एक ‘टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस’ बनाना और एक प्रभावी ISR grid (Intelligence, Surveillance, and Reconnaissance) तैयार करना शामिल है। इसके अलावा, अभ्यास के दौरान मोबाइल चेक पोस्ट स्थापित करना, कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन (CASO), चुनौतीपूर्ण हेलीबोर्न मिशन और ‘हाउस इंटरवेंशन ड्रिल’ जैसे जटिल सैन्य ऑपरेशन्स को अंजाम दिया जाएगा। भारतीय सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, Dharma Guardian 2026 न केवल भारत-जापान की बढ़ती रक्षा साझेदारी को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा (Regional Security) के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह अभ्यास दोनों सेनाओं को अपनी ‘Best practices’ साझा करने और शहरी परिवेश में आतंकवाद से निपटने के अपने कड़वे लेकिन प्रभावी अनुभवों से एक-दूसरे को सीखने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करता है।

    ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गहराते द्विपक्षीय संबंध

    यह 7वां संस्करण पिछले साल जापान के ‘ईस्ट फ़ूजी ट्रेनिंग एरिया’ में आयोजित हुए सफल 6वें संस्करण की अगली कड़ी है। गौरतलब है कि 2025 में हुआ वह अभ्यास एक मील का पत्थर साबित हुआ था क्योंकि उसमें कंपनी-स्ट्रेंथ लेवल पर बड़े पैमाने पर सैनिकों ने भाग लिया था। भारत और जापान के बीच यह रक्षा संबंध केवल सैन्य अभ्यासों तक ही सीमित नहीं हैं। हाल ही में जनवरी 2026 में, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके जापानी समकक्ष के बीच हुई ‘AI Dialogue’ की शुरुआत और रणनीतिक वार्ता (Strategic Dialogue) ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देश Bilateral cooperation के दायरे को लगातार बढ़ा रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप का गठन और रक्षा तकनीक में सहयोग इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों की सीमा सुरक्षा से लेकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति तक, दोनों देश एक सुर में बोल रहे हैं। Special Strategic and Global Partnership का यह हिस्सा न केवल चीन जैसे पड़ोसियों के लिए एक कड़ा संदेश है, बल्कि वैश्विक मंच पर एशिया की इन दो महाशक्तियों के बढ़ते कद का भी परिचायक है।

    क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक विजन

    उत्तराखंड के चौबटिया में होने वाला यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया की नजरें Indo-Pacific region पर टिकी हैं। भारत और जापान दोनों ही इस इलाके में शांति और स्थिरता बनाए रखने के पक्षधर रहे हैं। ‘धर्म गार्जियन 2026’ के माध्यम से सेनाएं यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि भविष्य में किसी भी अप्रत्याशित संकट या आतंकी खतरे की स्थिति में दोनों देश मिलकर त्वरित कार्रवाई कर सकें। इस अभ्यास के दौरान Operational experience का आदान-प्रदान सेनाओं के बीच गहरे भरोसे (Trust building) की नींव रखता है। स्थानीय स्तर पर भी उत्तराखंड के निवासियों के लिए यह गर्व का विषय है कि उनका राज्य अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का गवाह बन रहा है। इस पूरी कवायद का निचोड़ यही है कि भारत अपनी सैन्य कूटनीति के जरिए न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि जापान जैसे भरोसेमंद साथियों के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर एक संतुलित सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहा है।

  • देहरादून में ‘भारत श्री राष्ट्रीय रत्न पुरस्कार 2026’ का भव्य आयोजन, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने विभूतियों को किया सम्मानित

    देहरादून में ‘भारत श्री राष्ट्रीय रत्न पुरस्कार 2026’ का भव्य आयोजन, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने विभूतियों को किया सम्मानित

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर ऐतिहासिक पलों की साक्षी बनी, जब 21 फरवरी 2026 को उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVN) के ‘उज्ज्वल भवन’ में भारत श्री राष्ट्रीय रत्न पुरस्कार – 2026 का शानदार आयोजन किया गया। Institute for Social Reforms and Higher Education Charitable Trust (ISRHE) द्वारा आयोजित इस समारोह ने देशभर की उन प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने का काम किया, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में मील के पत्थर स्थापित किए हैं। ISRHE एक ऐसा National recognition प्राप्त संगठन है जो लंबे समय से Education and social reform की दिशा में काम कर रहा है। संस्था का मुख्य उद्देश्य Women and child empowerment के साथ-साथ हेल्थकेयर और रिसर्च को बढ़ावा देना है। इस भव्य आयोजन की गरिमा तब और बढ़ गई जब उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल और विधायक श्रीमती सविता कपूर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया। यह केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं था, बल्कि उन गुमनाम नायकों की कहानी को दुनिया के सामने लाने का एक सशक्त जरिया था, जो चुपचाप राष्ट्र निर्माण (Nation Building) में अपना पसीना बहा रहे हैं।

    दिग्गज मेहमानों की मौजूदगी और सांस्कृतिक छटा

    समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उत्तराखंड के वन और तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने अपने संबोधन में कहा कि समाज को दिशा देने वाले लोगों का सम्मान करना वास्तव में राष्ट्र का सम्मान है। विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित विधान सभा सदस्य श्रीमती सविता कपूर ने महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में UJVN Managing Director श्री संदीप सिंघल ने भी गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शिरकत की। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन मिस गौरी शर्मा और मिस गीत शर्मा ने किया, जिनकी वाकपटुता ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। इस Professional excellence को समर्पित शाम की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना से हुई, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम के आयोजक मंडल में शामिल डॉ. अतुल शर्मा (प्रेसिडेंट, ISRHE) और डॉ. रेशु गुप्ता (सेक्रेटरी, ISRHE) की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम था कि यह आयोजन एक अंतरराष्ट्रीय मानक (International Standards) के अनुरूप संपन्न हुआ। इस आयोजन के दौरान Ethical Leadership की जो मिसाल पेश की गई, वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

    चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और वैश्विक मानक

    ISRHE द्वारा पुरस्कार विजेताओं का चयन करना कोई आसान काम नहीं था। संस्थान ने इसके लिए एक बेहद जटिल और Transparent evaluation process का पालन किया, ताकि केवल सबसे योग्य और प्रतिभाशाली लोगों को ही यह सम्मान मिले। चाहे वह Higher Education का क्षेत्र हो या फिर ग्रामीण विकास का, हर नामांकन को बारीकी से परखा गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के भीतर देशभक्ति और गौरव का संचार कर दिया। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब समर्पण और विजन एक साथ मिलते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव की लहर पैदा होती है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई दिग्गजों ने इस मंच से अपनी सफलता की कहानियाँ साझा कीं, जो यह दर्शाती हैं कि भारत की असली ताकत उसकी विविध प्रतिभाओं में ही छिपी है। Social awareness को बढ़ावा देने वाला यह मंच आज के दौर में अत्यंत प्रासंगिक हो गया है।

    इन 73 विभूतियों को मिला सम्मान: देखें पूरी लिस्ट

    इस समारोह में देश के विभिन्न कोनों से आए कुल 73 दिग्गजों को सम्मानित किया गया, जिनकी सूची निम्नलिखित है:

    1. डॉ. प्रीति वाघेला: राजस्थानी लोक कला और कोरियोग्राफी की विशेषज्ञ।

    2. मिस्टर धैर्य रूपेश वाघेला: इंजीनियरिंग इनोवेशन (Engineering Innovation) में युवा अचीवर।

    3. सुश्री ध्वनि वाघेला: यंग अचीवर ऑफ द ईयर।

    4. डॉ. गोविंद सिंह कौंडल: जनसेवा और सामाजिक कल्याण में उत्कृष्ट योगदान।

    5. सुश्री रंजीता राहुल प्रजापति: अकादमिक नेतृत्व (Academic Leadership) में शानदार प्रदर्शन।

    6. डॉ. निर्मलेश कर: शिक्षा जगत की विशेष सेवा के लिए सम्मानित।

    7. डॉ. सचिन बंसोडे: एक असाधारण समाज सेवक के रूप में पहचान।

    8. डॉ. विजय राज बोलापल्ली: अनुसंधान (Research) के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि।

    9. प्रो. नितिका कौशल: चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) में अतुलनीय योगदान।

    10. डॉ. संजय बंसल: शैक्षणिक नेतृत्व के लिए विशिष्ट पुरस्कार।

    11. डॉ. विपुल पटेल: शिक्षा समुदाय को सशक्त बनाने में अहम भूमिका।

    12. प्रो. डॉ. नीति मिश्रा (PT): फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में ‘विमेन एक्सीलेंस अवार्ड’।

    13. डॉ. एस. वी. ए. आर. शास्त्री: प्रोफेसर ऑफ द ईयर का गौरवपूर्ण सम्मान।

    14. श्री रामचंदर मलकूची: Data architecture and cloud transformation में नवाचार के लिए पुरस्कृत।

    15. प्रो. (डॉ.) नीरज कुमार: शोध और अनुसंधान में उत्कृष्टता।

    16. डॉ. अंजू चौहान: प्रोफेशनल एक्सीलेंस के लिए सम्मानित।

    17. डॉ. सुषमा जायसवाल: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’।

    18. प्रो. डॉ. डेप्टी वारिकू: रिहैबिलिटेशन साइंसेज में विशेष योगदान।

    19. डॉ. श्रुति स्नेहा: उभरती हुई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर।

    20. डॉ. खुशबू सी. वालोडवाला: फिजियोथेरेपी में महिला उत्कृष्टता पुरस्कार।

    21. डॉ. पी. एलंगोवन: बेस्ट प्रोफेसर ऑफ द ईयर।

    22. मिस्टर समीर शर्मा: केमिकल बिजनेस में ‘एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर’।

    23. सुश्री अंकिता सिंह: युवा शिक्षिका के रूप में ‘यंग टीचर ऑफ द ईयर’।

    24. प्रो. (डॉ.) राजीव कुमार दुबे: मेडिकल एजुकेशन में विशेष योगदान।

    25. मिस्टर नीरज कुमार: इनोवेटिव टीचिंग के लिए विशेष सम्मान।

    26. डॉ. सिद्धार्थ शंकर सिंह: शैक्षणिक प्रशासन में शानदार कार्य।

    27. डॉ. रूपा तिरुमलसेट्टी: शिक्षा समुदाय के उत्थान के लिए सम्मानित।

    28. डॉ. एम. भूषणम: प्रोफेशनल एक्सीलेंस अवार्ड।

    29. पवन सुरोलिया “उपासक”: साहित्यिक लेखन (Literary Author) के लिए सम्मान।

    30. मिस्टर आसिक अहमद: सामाजिक योगदान और युवा साहित्य।

    31. डॉ. वलीबा विट्ठल पोपेरे: ग्रामीण और जनजातीय विकास के लिए बेहतरीन कार्य।

    32. श्री राजेंद्र कुमार वर्मा: भारत में प्रीमियम बॉबिन निर्माण के क्षेत्र में अग्रणी।

    33. डॉ. एस. सी. पांडे: अनुसंधान में विशेष योगदान।

    34. डॉ. सरवानी आनंदारा: रिसर्च फील्ड में उत्कृष्ट कार्य।

    35. डॉ. अरविंद पंडित खरात: Healthcare training और पैरामेडिकल शिक्षा के ‘नेशनल आइकॉन’।

    36. डॉ. सुमित कुशवाहा: रिसर्च और इनोवेशन में ‘राइजिंग स्टार’ अवॉर्ड।

    37. डॉ. ट्विंकल राजीव कुमार सिंह: शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण।

    38. प्रो. डॉ. प्रेम लाल जोशी: अकाउंटिंग एजुकेशन और रिसर्च के लिए सम्मान।

    39. डॉ. रेजीडी सुनीता: इंटरनेशनल एसडीजी इम्पैक्ट अवार्ड।

    40. सुश्री स्नेहा जैन: लेखन और मेंटल वेलबीइंग में उत्कृष्टता।

    41. एम्ब. डॉ. चंद्र लाल भारती: मानवाधिकार और दलित उत्थान के लिए पुरस्कार।

    42. डॉ. सुप्रियो मुखर्जी: व्यावसायिक उत्कृष्टता के लिए ‘भारत श्री राष्ट्रीय विभूषण पुरस्कार’।

    43. डॉ. सौमी मुखर्जी: नवाचार और नेतृत्व के लिए विशेष विभूषण सम्मान।

    44. डॉ. नागा मारुति नंदीराजू: प्रोफेशनल एक्सीलेंस अवार्ड।

    45. डॉ. नरेंद्र सिंह भाकुनी: कविता और साहित्य की दुनिया में बड़ा नाम।

    46. डॉ. निशांत विश्वकर्मा: इंटरनेशनल भरतनाट्यम गुरु पुरस्कार।

    47. प्रो. (डॉ.) संजय भूटानी: प्रतिष्ठित प्रोफेसर और व्यावसायिक उत्कृष्टता।

    48. डॉ. कोठा बलराजू गौड़: पत्रकारिता (Journalism) में विशेष योगदान।

    49. सुश्री पूजा त्यागी: उत्तर प्रदेश की प्रमुख रियल एस्टेट सलाहकार (Real Estate Consultant)।

    50. सुश्री मीनाक्षी साहू: सामुदायिक विकास के लिए विशेष योगदान।

    51. मेजर (प्रो.) डॉ. लक्ष्मी टी: प्रतिष्ठित प्रिंसिपल और शैक्षणिक मार्गदर्शक।

    52. डॉ. जी. थमरैसेलवी: एलआईएस शिक्षा में जीवन भर का योगदान।

    53. सुश्री अक्षिका त्रिवेदी: भारतीय संस्कृति और मूल्य-आधारित शिक्षा नेतृत्व।

    54. डॉ. भारती: प्रख्यात भाषा सलाहकार के रूप में पहचान।

    55. डॉ. सरस्वती दत्ता: अकादमिक नेतृत्व में उत्कृष्टता।

    56. प्रो. डॉ. ममीदन्ना एस: साल के अभिनव प्रोफेसर।

    57. डॉ. एन. बसेट्टी: हेल्थकेयर पर्सनैलिटी ऑफ द ईयर।

    58. डॉ. आरती हड़प: शिक्षण और अनुसंधान में महिला उत्कृष्टता।

    59. डॉ. सुमन घोष: अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार परियोजनाओं (Telecom Projects) में योगदान।

    60. डॉ. अनिल संतु काले: सामुदायिक स्वास्थ्य और शिक्षा पर गहरा प्रभाव।

    61. श्री आशीष तिवारी: इंडस्ट्रियल सेफ्टी ऑडिट (Industrial Safety) में विशेषज्ञता।

    62. डॉ. प्रशांत वर्मा: मानविकी अध्ययन में उत्कृष्ट योगदान।

    63. डॉ. निवेदिता मुखर्जी: छात्र विकास और मार्गदर्शन के लिए पुरस्कार।

    64. श्री रघु गोलापुडी: ओरेकल डेटाबेस (Oracle Database) एक्सीलेंस अवार्ड।

    65. एडवोकेट श्री गिरीश विजयकुमार ज़ावर: सामाजिक सेवा और प्रभावी नेतृत्व।

    66. श्रीमती पूनम मोरे तोड़कर: सफल उद्यमी और सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता।

    67. श्री सचिन नाइक: दूरदर्शी उद्यमी (Visionary Entrepreneur)।

    68. डॉ. जजबीर सिंह: आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में उत्कृष्ट अभ्यास।

    69. श्रीमती कमला जुडियाल: सामाजिक कल्याण और सामुदायिक सेवा।

    70. डॉ. अन्नपूर्णा बोरूआ: उद्योग-अकादमिक तालमेल में बेहतरीन योगदान।

    71. डॉ. प्रदीप कुमार गौड़: विशिष्ट प्रोफेशनल उत्कृष्टता (चार्टर्ड एकाउंटेंट)।

    72. श्री विकास उप्रेती: स्वास्थ्य सेवा आहार और लॉन्ड्री सेवा में नवाचार।

    73. डॉ. वटकर सुशीलकुमार शिवाजी: यंग प्रोफेसर ऑफ द ईयर अवार्ड।

    यह आयोजन देहरादून के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। ISRHE ने यह सुनिश्चित किया कि सम्मान केवल उन्हीं हाथों तक पहुंचे जिन्होंने वास्तव में समाज को कुछ दिया है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की इन प्रतिभाओं ने एक बार फिर साबित किया कि भारत में काबिलियत की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है तो उन्हें ‘भारत श्री’ जैसे मंचों की जो उन्हें पहचान दिला सकें।