देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सैन्य कूटनीति का केंद्र बनने जा रही है। भारतीय सेना ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत और जापान के बीच बहुप्रतीक्षित संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘Dharma Guardian 2026’ का 7वां संस्करण कल यानी 24 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। अल्मोड़ा जिले के पास स्थित Chaubatia, Uttarakhand के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में होने वाला यह अभ्यास 9 मार्च 2026 तक चलेगा। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य Joint urban warfare और आतंकवाद विरोधी अभियानों (Counter-terrorism operations) के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल यानी ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ को एक नए स्तर पर ले जाना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां इस तरह के कठिन सैन्य प्रशिक्षण के लिए दुनिया में सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। दो हफ़्तों तक चलने वाले इस सघन कार्यक्रम में भारतीय सैनिक और जापानी आत्म-रक्षा बल (JGSDF) के जवान एक साथ मिलकर आधुनिक युद्ध की बारीकियों को समझेंगे और अपनी रणनीतिक क्षमताओं को साझा करेंगे।
तकनीक और कौशल का अनूठा संगम: ISR ग्रिड से लेकर हेलीबोर्न मिशन तक
आगामी 14 दिनों के भीतर, दोनों सेनाएं न केवल अपने हथियारों का प्रदर्शन करेंगी, बल्कि Tactical drills को सिंक्रोनाइज़ करने और विशेष कॉम्बैट स्किल्स पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी। इस अभ्यास की रूपरेखा को काफी आधुनिक बनाया गया है, जिसमें एक ‘टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस’ बनाना और एक प्रभावी ISR grid (Intelligence, Surveillance, and Reconnaissance) तैयार करना शामिल है। इसके अलावा, अभ्यास के दौरान मोबाइल चेक पोस्ट स्थापित करना, कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन (CASO), चुनौतीपूर्ण हेलीबोर्न मिशन और ‘हाउस इंटरवेंशन ड्रिल’ जैसे जटिल सैन्य ऑपरेशन्स को अंजाम दिया जाएगा। भारतीय सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, Dharma Guardian 2026 न केवल भारत-जापान की बढ़ती रक्षा साझेदारी को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा (Regional Security) के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह अभ्यास दोनों सेनाओं को अपनी ‘Best practices’ साझा करने और शहरी परिवेश में आतंकवाद से निपटने के अपने कड़वे लेकिन प्रभावी अनुभवों से एक-दूसरे को सीखने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गहराते द्विपक्षीय संबंध
यह 7वां संस्करण पिछले साल जापान के ‘ईस्ट फ़ूजी ट्रेनिंग एरिया’ में आयोजित हुए सफल 6वें संस्करण की अगली कड़ी है। गौरतलब है कि 2025 में हुआ वह अभ्यास एक मील का पत्थर साबित हुआ था क्योंकि उसमें कंपनी-स्ट्रेंथ लेवल पर बड़े पैमाने पर सैनिकों ने भाग लिया था। भारत और जापान के बीच यह रक्षा संबंध केवल सैन्य अभ्यासों तक ही सीमित नहीं हैं। हाल ही में जनवरी 2026 में, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके जापानी समकक्ष के बीच हुई ‘AI Dialogue’ की शुरुआत और रणनीतिक वार्ता (Strategic Dialogue) ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देश Bilateral cooperation के दायरे को लगातार बढ़ा रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप का गठन और रक्षा तकनीक में सहयोग इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों की सीमा सुरक्षा से लेकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति तक, दोनों देश एक सुर में बोल रहे हैं। Special Strategic and Global Partnership का यह हिस्सा न केवल चीन जैसे पड़ोसियों के लिए एक कड़ा संदेश है, बल्कि वैश्विक मंच पर एशिया की इन दो महाशक्तियों के बढ़ते कद का भी परिचायक है।
क्षेत्रीय स्थिरता और इंडो-पैसिफिक विजन
उत्तराखंड के चौबटिया में होने वाला यह अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया की नजरें Indo-Pacific region पर टिकी हैं। भारत और जापान दोनों ही इस इलाके में शांति और स्थिरता बनाए रखने के पक्षधर रहे हैं। ‘धर्म गार्जियन 2026’ के माध्यम से सेनाएं यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि भविष्य में किसी भी अप्रत्याशित संकट या आतंकी खतरे की स्थिति में दोनों देश मिलकर त्वरित कार्रवाई कर सकें। इस अभ्यास के दौरान Operational experience का आदान-प्रदान सेनाओं के बीच गहरे भरोसे (Trust building) की नींव रखता है। स्थानीय स्तर पर भी उत्तराखंड के निवासियों के लिए यह गर्व का विषय है कि उनका राज्य अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का गवाह बन रहा है। इस पूरी कवायद का निचोड़ यही है कि भारत अपनी सैन्य कूटनीति के जरिए न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि जापान जैसे भरोसेमंद साथियों के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर एक संतुलित सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहा है।








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