हरिद्वार रोडवेज में वेतन संकट: “साहब! वेतन दे दो ताकि हम भी मना सकें होली”, कर्मचारियों ने एजीएम को सौंपा ज्ञापन

हरिद्वार: उत्तराखंड में होली के त्योहार की खुशियाँ परवान चढ़ रही हैं, लेकिन हरिद्वार रोडवेज डिपो के सैकड़ों कर्मचारियों के घरों में इस बार अंधेरा छाया हुआ है। पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने से नाराज रोडवेज कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। शुक्रवार को कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हरिद्वार डिपो के सहायक महाप्रबंधक (AGM) का घेराव किया और स्पष्ट कर दिया कि यदि त्योहार से पहले भुगतान नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

पक्के और कच्चे सभी कर्मचारी बेहाल

रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने साफ कर दिया है कि वेतन का संकट सिर्फ नियमित अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिपो के हर छोटे-बड़े कर्मचारी का बुरा हाल है। यूनियन की ओर से दिए गए ज्ञापन में चार मुख्य श्रेणियों के लिए तत्काल भुगतान की मांग की गई है:

  • नियमित कर्मचारी (Regular Staff): इनका घर खर्च चलाना अब मुश्किल हो चला है।

  • संविदा कर्मचारी (Contractual Workers): कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी सबसे ज्यादा आर्थिक मार झेल रहे हैं।

  • PRD और एजेंसी स्टाफ: पीआरडी और बाहरी एजेंसी के जरिए काम करने वालों के पास भी पैसा नहीं पहुँचा है।

  • विशेष श्रेणी (Special Category): इस वर्ग के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

“परिवार चलाना हुआ मुश्किल”

कर्मचारियों का कहना है कि जनवरी और फरवरी महीने का वेतन अटकने से उनकी पूरी बजट व्यवस्था पटरी से उतर गई है। आलम यह है कि दिसंबर का वेतन भी बड़ी जद्दोजहद के बाद महज एक सप्ताह पहले नसीब हुआ था। कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वेतन न मिलने से राशन से लेकर बच्चों की स्कूल फीस तक के लिए संकट खड़ा हो गया है। उनकी मांग है कि इन सभी वर्गों को होली से पहले भुगतान किया जाए ताकि वे भी अपने परिवारों के साथ खुशी-खुशी त्योहार मना सकें।

हड़ताल की आहट?

होली के मौके पर रोडवेज बसों पर यात्रियों का भारी दबाव रहता है। हरिद्वार डिपो से उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों के लिए बड़ी संख्या में बसें चलती हैं। ऐसे में यदि कर्मचारियों का असंतोष बढ़ता है और वे किसी कड़े कदम की ओर बढ़ते हैं, तो परिवहन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल, एजीएम ने कर्मचारियों की मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुँचाने का आश्वासन दिया है, लेकिन कर्मचारी अब केवल कोरे आश्वासनों से संतुष्ट होने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

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