उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रविवार को मुख्यमंत्री कैंप ऑफिस स्थित मुख्य सेवक सदन एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने Sanskrit Student Talent Award कार्यक्रम में शिरकत कर प्रदेश की प्राचीन भाषा को नई ऊर्जा प्रदान की। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने मेधावी छात्राओं के लिए Gargi Girls Sanskrit Scholarship और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए Dr. BR Ambedkar SC/ST Sanskrit Scholarship का वितरण किया। सीएम धामी ने न केवल छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि संस्कृत को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ‘कॉम्पिटिटिव एग्जाम सेल्फ-स्टडी सेंटर’ और ‘ई-संस्कृत बातचीत कैंप’ का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य Sanskrit education को सुलभ बनाना और छात्रों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी की त्रैमासिक पत्रिका ‘संस्कृत वार्ता’ का विमोचन करते हुए स्पष्ट किया कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी Cultural heritage का आधार है। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों की ओर लौटने और राष्ट्र निर्माण में इस देवभाषा के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
हरिद्वार कुंभ 2027: विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ होगा ऐतिहासिक आयोजन
संस्कृत कार्यक्रम से पूर्व, मुख्यमंत्री धामी ने शनिवार को हरिद्वार का दौरा कर आगामी कुंभ मेले की तैयारियों की कमान संभाली। एक High-level meeting के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अगला कुंभ मेला ‘दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक’ होना चाहिए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और Public facilities सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कुंभ से जुड़े सभी स्थायी निर्माण कार्य इस साल अक्टूबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कुंभ क्षेत्र में Infrastructure development की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘थर्ड-पार्टी ऑडिट’ का आदेश भी दिया है। बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। Urban planning के तहत घाटों का सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के आने-जाने के रास्तों को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। सीएम ने अधिकारियों को ‘टाइम-बाउंड मैनर’ में काम करने और सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल (Coordination) बिठाने की नसीहत दी।
श्रद्धालुओं के लिए स्मार्ट सुविधाएं: नाव एम्बुलेंस और विशेष पार्किंग व्यवस्था
कुंभ मेले के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक व्यापक Transport and parking strategy तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे वैकल्पिक मार्गों की पहचान करें ताकि जाम की स्थिति न बने। विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए घाटों पर विशेष प्रबंध किए जाएंगे। Healthcare management को लेकर मुख्यमंत्री ने एक अनूठी पहल की है, जिसके तहत भीड़भाड़ वाले इलाकों और गंगा के घाटों पर बीमार लोगों की मदद के लिए ‘नाव और बाइक एम्बुलेंस’ (Bike Ambulance Service) तैनात की जाएगी। स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंने Waste management के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद लेने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री का विजन है कि हरिद्वार आने वाला हर श्रद्धालु उत्तराखंड की अतिथि देवो भवः की परंपरा और Spiritual experience की सुखद यादें लेकर जाए। इस बड़े आयोजन के लिए ज़ोन और सेक्टर स्तर पर माइक्रो-प्लानिंग शुरू कर दी गई है।
विरासत और विकास का संतुलन: उत्तराखंड सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ये दोनों कार्यक्रम एक बड़े विजन को दर्शाते हैं। एक तरफ जहां वे Language conservation के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुंभ जैसे वैश्विक आयोजन के जरिए प्रदेश के Tourism and infrastructure को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साझा सांस्कृतिक परिवेश में हरिद्वार कुंभ का विशेष महत्व है, जिसे देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े मानक तय किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों की प्रोग्रेस रिपोर्ट समय-समय पर अपडेट की जाए। इस बार कुंभ में तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल होगा, जिससे Crowd management और रियल-टाइम मॉनिटरिंग में आसानी होगी। धामी सरकार का यह संकल्प है कि 2027 का कुंभ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बने, बल्कि आधुनिक उत्तराखंड की कार्यक्षमता का भी प्रतीक बने।








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